काका परनाम का हाल चल बा

काका परनाम का हाल चल बा 1

काका परनाम का हाल चल बा, बाबू जो सबका हाल है वही हमारा भी है. देश का हाल बड़ा खराब है , समाचार में बता रहा था. तुम कैसे हो बाबू काका चप्पल घिस गया है, रोटी कम हो गया है थाली मैं. सरकार कदम उठा रही है और रख भी रही है. लेकिन लाइन में लग के भोजन लेना बड़ा जिल्लत महसूस करवा रहा है। काहे नहीं घर आ जाते हो, यहाँ अपनी घर की रोटी तो है , सही बात है काका लेकिन बाबू पढ़ रहा है सोचे थे बड़ा होगा और कुछ बन जाय तो हमहु अपने घर चले।

घर की बड़ी याद आ रही है , कोरोना के साथ जीना पड़े है काका कुछ बहुत पड़े लिखे लोग बोल रहे हैं, हम सोच रहे जब उसके साथ ही जीना है तो कहे सबको अपने अपने घर में कैद किये हुए हैं.

हमरी सरकार कदम उठा रही और हमरी छाती पर रख रही, जैसे तेल के दाम बड़ा के और ठेका खोल के। हमहू काका मन बना लये है सरकार कही तभी बहार जाऊंगा और अपने भाई लोग से भी बोल दिए हैं जब तक साहेब लोग न कहे घर में रहो, कहे इनेक तो तनख्वाह आ ही रही है हम अपना सोचे।