BJP को पश्चिम बंगाल में बड़े बदलाव की उम्मीद, झोंकी पूरी ताकत

BJP को पश्चिम बंगाल में बड़े बदलाव की उम्मीद, झोंकी पूरी ताकत 1

नई दिल्ली

लोकसभा चुनाव 2019 में पश्चिम बंगाल बीजेपी के लिए कितना महत्वपूर्ण हो चुका है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कूच बिहार में की गई पीएम मोदी रैली, राज्य में पिछले दो महीने में चौथी रैली थी। इस राज्य की राजनीति जहां आम तौर पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के इर्द-गिर्द रही है। कम्युनिस्ट पार्टी के पास पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक सत्ता में रहने का रेकॉर्ड है। ऐसे में जिस राज्य ने कभी बीजेपी को मुख्य पार्टी नहीं माना, इस बार उम्मीद से बीजेपी की तरफ देख रहा है?

2014 में बीजेपी ने हिंदी हार्टलैंड माने जाने वाले उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और दिल्ली की 226 सीटों में से 196 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की। इसके बाद 2018 में पार्टी को राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा। ऐसे में बीजेपी ऐसे राज्यों की तरफ ज्यादा उम्मीद से देख रही है।

पश्चिम बंगाल लोकसभा सांसदों की दृष्टि से देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। इस लिस्ट में सबसे ऊपर 80 सीटों के साथ उत्तर प्रदेश और इसके बाद 48 सीटों के साथ महाराष्ट्र है। बंगाल में बीजेपी पिछले 20 सालों में 2 सीटों से ऊपर नहीं उठ पाई है। 1999 में पार्टी ने दो सीटें जीती, 2004 में कोई सीट नहीं, 2009 में एक सीट और 2014 में फिर से दो सीटें जीती। जिस चीज ने बीजेपी को राहत दी है, वह है कि यहां 2009 के मुकाबले 2014 में पार्टी का वोट शेयर तीन गुना बढ़ा है। इस मामले में बीजेपी बंगाल में तीसरे नंबर पर है, जबकि कांग्रेस चौथे नंबर पर।

बीजेपी का दावा है कि वह राज्य में 22 लोकसभा सीट जीतकर आएगी। बीजेपी के लोग इसे अपना आत्मविश्वास कहते हैं, वहीं कुछ लोग इसे अति आत्मविश्वास कहते हैं। बीजेपी यहां विकास और ‘धर्म’ को मुद्दा बनाने की कोशिश करेगी। यह पार्टी के लिए दोधारी तलवार हो सकता है। राज्य प्रतिव्यक्ति आय के मामले में 2011-12 में जहां 15 वें नंबर पर था, वहीं 2017-18 में यह 10वें नंबर पर आ गया।

30 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले पश्चिम बंगाल में तृणमूल के लिए भी यह समय काफी अहम हो सकता है। बीजेपी सारदा घोटाले जैसे मामले उठाकर तृणमूल कांग्रेस को पछाड़ने की कोशिश करेगी। इस बार सिर्फ एक चीज है जो बेहद साफ है। वह यह है कि पश्चिम बंगाल में इस बार लड़ाई सिर्फ तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच में है। जबकि 1947 से 2011 तक महत्वपूर्ण रोल निभाने वाले कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी इस बार उतनी असरदार नजर नहीं आ रही हैं।