कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने वायनाड लोकसभा सीट से दाखिल किया पर्चा

कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने वायनाड लोकसभा सीट से दाखिल किया पर्चा 1

वायनाड

कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को ‘भगवान के अपने देश’ कहे जाने वाले केरल के वायनाड लोकसभा सीट से पर्चा दाखिल कर दिया। नामांकन करने के बाद राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्‍य नेताओं के साथ रोड शो करने निकले। करीब दो किलोमीटर लंबे रोड शो के जरिए राहुल गांधी ने अल्‍पसंख्‍यक बहुल इस सीट पर अपनी सियासी ताकत का अहसास करा रहे हैं।

राहुल गांधी के रोड शो को देखते हुए बड़ी संख्‍या में कांग्रेस कायकर्ता उनके स्‍वागत में जमा हुए हैं। पहले राहुल गांधी के रोड शो अनुमति नहीं मिली थी लेकिन बाद में सरकार ने उन्‍हें अनुमति दे दी। इससे पहले वायनाड से पर्चा दाखिल करने के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा था कि दक्षिण भारत में एक भावना है कि मौजूदा एनडीए सरकार में उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दक्षिण भारत को लगता है कि नरेंद्र मोदी उनसे शत्रुता का भाव रखते हैं। उनको लगता है कि इस देश की, निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनको शामिल नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘मैं दक्षिण भारत को संदेश देना चाहता था कि हम आपके साथ खड़े हैं। इसलिए मैंने केरल से चुनाव लड़ने का फैसला किया।’ गौरतलब है कि केरल की सभी 20 सीटों के लिए आगामी 23 अप्रैल को मतदान होना है। केरल में बीजेपी की सहयोगी पार्टी भारत धर्म जनसेना के अध्यक्ष तुषार वेल्लापल्ली राहुल के खिलाफ वायनाड सीट से लड़ेंगे। राज्य में बड़े हिंदू समुदाय का प्रतिनिधत्व करने वाले बीडीजेएस के दम पर एनडीए गठबंधन को यहां बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। पार्टी इस मान्यता के साथ खड़ी हुई कि केरल में वर्षों से एलडीएफ और यूडीएफ सरकारों में अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व मिला है, इसलिए राज्य में एक हिंदुओं की बात करने वाली पार्टी भी जरूरी है।

उधर, सत्‍तारूढ़ वामपंथी दलों के गठबंधन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा ने वायनाड से सीपीएम के पीपी सुनीर को मैदान में उतारा है। सीपीएम के वायनाड जिले के नेता विजयन चेरूकारा ने कहा कि राहुल गांधी अदृश्य भगवान की तरह हैं। उनके लिए अपने पारिवारिक गढ़ अमेठी से जीतना आसान होगा, लेकिन वायनाड की धरती कुछ अलग है। हम उन्हें सिखाएंगे कि जमीन पर चुनाव कैसे लड़े जाते हैं। वायनाड लोकसभा सीट के तहत सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

इस संसदीय क्षेत्र में मनंतावडी, तिरुवंबडी, वानदूर, सुल्तानबथेरी, एरनाड, कलपत्ता और निलंबूर विधानसभा सीटें आती हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को वायनाड लोकसभा सीट पर महज 20,870 वोटों के अंतर से जीत हासिल हुई थी। कांग्रेस कैंडिडेट एमआई शानवास को एलडीएफ के सत्यन मोकेरी से कुल पड़े वोटों में से 1.81 प्रतिशत ज्यादा मत हासिल हुए थे। शानवास को 3,77,035 और मोकेरी को 3,56,165 वोट मिले थे। वहीं, बीजेपी के पीआर रस्मिलनाथ को 80,752 मत हासिल हुए थे। यूडीएफ यानी कांग्रेस को यहां 41.2 प्रतिशत और एलडीएफ को 39.39 प्रतिशत वोट मिले थे।
वायनाड संसदीय क्षेत्र में मुस्लिम वोटर्स की तादाद सबसे ज्यादा है। यूडीएफ की दूसरी सबसे बड़ी साझेदार इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का इस क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है। वायनाड जिले में हिंदू आबादी 49.7 प्रतिशत है, जबकि क्रिस्चन और मुस्लिम समुदाय क्रमशः 21.5 और 28.8 प्रतिशत हैं। हालांकि, मलप्पुरम में 70.4 प्रतिशत मुस्लिम, 27.5 प्रतिशत हिंदू और 2 प्रतिशत क्रिस्चन हैं। वायनाड लोकसभा क्षेत्र में कुल सवा 13 लाख वोटरों में 56 प्रतिशत यानी आधे से भी ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि यहां से राहुल गांधी के उतरने की वजह से उसे अल्पसंख्यकों के वोट एकतरफा मिलेंगे।