दो पूर्व ओलिंपियंस आमने- सामने: राज्यवर्धन सिंह राठौड़/ कृष्णा पूनिया

दो पूर्व ओलिंपियंस आमने- सामने: राज्यवर्धन सिंह राठौड़/ कृष्णा पूनिया 1

जयपुर

राजस्थान में जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट पर इस बार दिलचस्प मुकाबला है। यहां दो पूर्व ओलिंपियंस के बीच कांटे की टक्कर है। एक ओर केंद्रीय खेल मंत्री और पूर्व निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह राठौर हैं तो दूसरी ओर डिस्कस थ्रो की खिलाड़ी रह चुकीं कृष्णा पूनिया । पूनिया इस समय कांग्रेस से विधायक भी हैं। 2004 के एथेंस ओलंपिक गेम्स में राठौड़ ने डबल ट्रैप शूटिंग में सिल्वर मेडल जीता था। वहीं, पूनिया 2012 के लंदन ओलिंपिक गेम्स की डिस्कस थ्रो इवेंट में छठे नंबर पर रही थीं।

जयपुर ग्रामीण से वर्तमान सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का पहले से ही चुनाव लड़ना तय माना जा रहा था और उनका नाम बीजेपी की ओर से जारी की गई पहली लिस्ट में ही शामिल था। दूसरी ओर कृष्णा पूनिया के यहां से लड़ने की कोई चर्चा नहीं थी। यहां तक कि पूनिया को खुद भी नहीं पता था कि उन्हें राठौड़ के खिलाफ उतारा जाएगा। सोमवार को उनके नाम की घोषणा की गई।

पूनिया ने बताया, ‘मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बात करने के बाद यह पक्का हुआ कि कांग्रेस पार्टी मुझे इस सीट से लड़ाना चाहती है।’ हालांकि इसके बावजूद पूनिया ने चुनौती स्वीकार करते हुए कहा, ‘यह मेरे लिए एक चुनौती है।’

उम्मीदवारी के ठीक बाद राठौड़ पर पहला हमला बोलते हुए पूनिया ने कहा, ‘मैं एक किसान की बेटी हूं और मुझे गांव के लोगों की परेशानियों के बारे में पता है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं एक ऐसे खेल की खिलाड़ी रही हूं जो गांव के युवा खेलते हैं। मैंने किसी एयर कंडीशंड हॉल में खेलते हुए मेडल नहीं जीते हैं।’

दोनों ने 2013 में सियासत की पारी शुरू की। बीजेपी में शामिल होने के बाद मोदी लहर के बीच राठौड़ ने लोकसभा चुनाव जीता। हालांकि पूनिया दिसंबर 2013 के विधानसभा चुनाव में हार गई थीं। लेकिन पांच साल बाद हालात बदल चुके हैं। पूनिया इस वक्त सादुलपुर से विधायक हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दो कद्दावर नेताओं मनोज न्यांगली और बीजेपी के सीनियर लीडर राम सिंह कस्वां को शिकस्त दी थी।
एथेंस ओलिंपिक में सिल्वर मेडल जीतने के अलावा राठौड़ वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में दो बार गोल्ड जीत चुके हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी दो बार सोने का तमगा हासिल किया है। राजनीति में अब वह एक स्थापित शख्सियत हैं और सियासी पारी में देरी के बावजूद वह बहुत जल्द मंत्री भी बन गए। बीजेपी उन्हें जिताने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। दूसरी ओर राज्य की सत्ता में वापसी के बाद कांग्रेस भी पूनिया के समर्थन में अपनी पूरी ताकत झोंकेगी।

राजस्थान में जातीय समीकरण भी अहम भूमिका निभाते हैं। जाट समुदाय से आने वाली पूनिया को सजातीय वोटों का भरोसा है। जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट पर करीब 23 प्रतिशत जाट वोटर हैं। राजपूत समुदाय से आने वाले राठौड़ ने 2014 के लोकसभा चुनाव में दिग्गज कांग्रेस नेता सीपी जोशी को 3 लाख से ज्यादा वोटों से करारी शिकस्त दी थी। इस लोकसभा क्षेत्र में राजपूत समुदाय के 10 प्रतिशत वोट हैं।