कांग्रेस के घोषणापत्र ‘जन आवाज’ पर बीजेपी का तंज कहा- देश तोड़ने का अजेंडा

कांग्रेस के घोषणापत्र 'जन आवाज' पर बीजेपी का तंज कहा- देश तोड़ने का अजेंडा 1

नई दिल्ली
कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को अपना चुनावी घोषणापत्र जारी किया। जिसे ‘जन आवाज’ नाम दिया। इस घोषणा पत्र के कुछ ही घंटे बाद बीजेपी ने इस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि कांग्रेस पार्टी खतरनाक वादे कर रही है और उसके मेनिफेस्टो में ऐसा अजेंडा है जो देश को तोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ वादे तो ऐसे हैं जिन्हें लागू ही नहीं किया जा सकता। आपको बता दें कि कांग्रेस ने ‘हम निभाएंगे’ के वादे के साथ न्यूनतम आय योजना, रोजगार सृजन और किसानों के लिए अलग बजट समेत कई बड़े ऐलान किए हैं। इस पर जेटली ने कहा कि कांग्रेस के घोषणापत्र में ऐसी बातें हैं, जो देश की एकता के खिलाफ हैं।

घोषणापत्र के सहारे कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाते हुए जेटली ने कहा कि नेहरू-गांधी परिवार की जम्मू और कश्मीर को लेकर जो ऐतिहासिक भूल थी, उसके लिए माफ नहीं किया जा सकता पर अब उस अजेंडे को ये आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तरफ से किए गए बड़े-बड़े वादे नासमझी में किए गए हैं।

जेटली ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का नेतृत्व जिहादियों और माओवादियों के चंगुल में है। वे घोषणापत्र में कह रहे हैं कि आईपीसी से सेक्शन 124-A हटा दिया जाएगा, राजद्रोह करना अब अपराध नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रावधान को नेहरू, इंदिरा, राजीव, मनमोहन ने छूने का प्रयास नहीं किया। अब वे कह रहे हैं कि राजद्रोह का प्रावधान हटा दिया जाएगा। जो पार्टी इस तरह की घोषणा करती है, वह एक भी वोट की हकदार नहीं हैं। जेटली ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने जो खतरनाक वादे किए हैं, देश की जनता उन्हें यह अवसर ही नहीं देगी।

अरूण जेटली की प्रेस कॉन्फ्रेंस चल ही रही थी तभी कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेता आरोपों का जवाब देने के लिए आगे आए। जयराम रमेश, पी. चिदंबरम और रणदीप सुरजेवाला ने राजद्रोह कानून को लेकर कांग्रेस के वादे पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राजद्रोह अंग्रेजों के जमाने का कानून है। देश में डिफेंस ऑफ इंडिया कानून बनाया गया, जो लोग न पूरे वकील हैं न पूरे वित्त मंत्री हैं उन्हें इस बारे में पता नहीं है। उसके साथ-साथ अनलॉफुल ऐक्टिविटीज प्रिवेंशन कानून भी बनाया गया, ये दोनों कानून भारतीय दंड संहिता और क्रिमिनल प्रसीडिंग कोड में हैं जो भारत के प्रति दुराग्रह रखने वाले लोगों पर लागू होता है इसलिए अंग्रेजों के जमाने के इस कानून को रखने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि यह आजकल केवल पत्रकारों और राजनेताओं पर लगाया जाता है।

जेटली ने कहा कि इस पार्टी का इतिहास गरीबों के साथ नारों के जरिए खिलवाड़ करने का रहा है और देश उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। बीजेपी नेता ने कहा कि 10 वर्षों तक हम जब विपक्ष में रहे तब जब भी UPA सरकार का बजट पेश किया जाता था तब इसका असली मंतव्य हमेशा इसके विस्तार में जाने पर ही पता चलता था।

न्याय योजना पर जेटली ने सवाल उठाया कि कांग्रेस ने स्पष्ट नहीं किया है कि वह पैसा कहां से लाएंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कहा जा रहा है कि अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी तो पैसा भी आएगा। जेटली ने कहा कि यही सोचकर 80 के दशक में राजीव और इंदिरा ने गैर जिम्मेदाराना काम किया था। आमदनी बढ़ाई नहीं और खर्चा बढ़ा दिया। बाद में देश को बचाने के लिए मनमोहन सिंह को ढूंढकर लाना पड़ा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘न्याय’ की कुछ बातें सामने आई हैं। चला है कि यह केंद्र की योजना नहीं है इसके साधन केंद्र से भी आएंगे और राज्य से भी आएंगे। उन्होंने कहा कि पहले दिन कांग्रेस ने तो नहीं कहा था कि यह केंद्र और राज्य की संयुक्त स्कीम है।

बीजेपी नेता ने कहा कि उनके एक अर्थशास्त्री ने कहा है कि टैक्स लगाएंगे, अब अगर ऐसा है हमने तो टैक्स घटाएं हैं और कांग्रेस टैक्स लगाना चाहते हैं तो क्लियर कर दीजिए। इस पर जवाब देते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि हम संसाधन अर्जित करेंगे, राजकोषीय घाटे को मेनटेन करेंगे और फिर इस घोषणापत्र में मौजूद घोषणाओं को पूरा करेंगे।

इससे पहले जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वैसे तो एक ड्राफ्टिंग कमिटी थी लेकिन ऐसा लगता है कि जम्मू और कश्मीर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पॉइंट्स की ड्राफ्टिंग कांग्रेस अध्यक्ष के ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के दोस्तों ने तैयार की है।

सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (AFSPA) को खत्म करने को लेकर कांग्रेस के वादे पर जेटली ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि घोषणापत्र में कहा गया है कि रूल्स, रेग्युलेशंस की समीक्षा की जाएगी। 72 वर्षों में भारत को दुनिया में सबसे अधिक आतंकवाद झेलना पड़ा है। जो देश को तोड़ना चाहते थे, वे देश में पहले से ही सक्रिय थे। उन्होंने कहा, ‘हमने जम्मू-कश्मीर, दक्षिण, मध्य, पूर्वोत्तर और पंजाब में अलगाववादी और हिंसक आंदोलन देखे हैं। अब इस समस्या को कई क्षेत्रों में काफी हद तक काबू कर चुके हैं। हमने जम्मू-कश्मीर का बड़ा हिस्सा खोया।’

किसानों की कर्ज माफी के मुद्दे पर जेटली ने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में किसानों की कर्ज माफी पर सांकेतिक कदम भी नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में कश्मीरी पंडितों की तकलीफ का जिक्र तक नहीं किया। उन्होंने कहा कि कम से कम सेक्युलरिज्म के नाम पर ही उनका जिक्र कर देते।

जीएसटी के संदर्भ में कांग्रेस अध्यक्ष के बयानों के संदर्भ में जेटली ने कहा कि राहुल गांधी एक बार सिंगापुर गए थे, सिंगापुर में कोई गरीबी रेखा के नीचे है ही नहीं तो वहां एक टैक्स ढांचा चलता है। भारत जैसे देश में जहां काफी संख्या में लोग गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं, वहां एक टैक्स स्लैब कैसे चल सकता है? वित्त मंत्री ने कहा कि क्या गरीब इंसान के कपड़े, चप्पल और एयर कंडीशनर पर एक ही टैक्स लगेगा? जो वादे नासमझी में किए जाते हैं उन वादों का कोई अर्थ नहीं होता।