केरल के वायनाड में तुषार से मिलेगी राहुल गांधी को टक्कर!

केरल के वायनाड में तुषार से मिलेगी राहुल गांधी को टक्कर! 1

तिरुवनंतपुरम

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के अमेठी के साथ-साथ केरल के वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद से यह सीट चर्चा में आ गई है। लेफ्ट ने इस सीट से राहुल को हराने की बात कही है वहीं, बीजेपी ने भी इस सीट पर राहुल को घेरने की योजना बना ली है। केरल में बीजेपी की सहयोगी पार्टी भारत धर्म जनसेना (बीडीजेएस) के अध्यक्ष तुषार वेल्लापल्ली राहुल के खिलाफ वायनाड सीट से लड़ेंगे। राज्य में बड़े हिंदू समुदाय का प्रतिनिधत्व करने वाले बीडीजेएस के दम पर एनडीए गठबंधन को यहां बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। एनडीए में शामिल बीडीजेएस को केरल में 5 सीटें मिली हैं। तुषार को पहले त्रिशूर से टिकट दिया गया था और वह प्रचार भी शुरू कर चुके थे। हालांकि उन्होंने तब यह कहा था कि अगर राहुल गांधी वायनाड से चुनाव लड़ते हैं तो पार्टी की उम्मीदवारी में कुछ बदलाव किया जा सकता है। सोमवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने साफ कर दिया कि तुषार ही वायनाड से लड़ेंगे।

दरअसल, केरल में बीडीजेएस पार्टी का गठन दिसंबर 2015 में हुआ। पार्टी इस मान्यता के साथ खड़ी हुई कि केरल में वर्षों से एलडीएफ और यूडीएफ सरकारों में अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व मिला है, इसलिए राज्य में एक हिंदुओं की बात करने वाली पार्टी भी जरूरी है। पार्टी की स्थापना के साथ ही साफ हो गया था कि केरल में अब हिंदू संगठनों का बड़ा फ्रंट बनने वाला है।

बीडीजेएस के गठन के पीछे राज्य के प्रभावशाली संगठन श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (एसएनडीपी) के नेता थे। यह संगठन राज्य में सबसे ज्यादा आबादी वाले हिंदू ग्रुप- एझावा पिछड़ा समुदाय (करीब 20.9%) के कल्याण के लिए काम करता है। एसएनडीपी के महासचिव वेल्लाप्पली नतेशन हैं, जो केरल के प्रभावशाली लोगों में से हैं। तुषार वेल्लाप्पली नतेशन के बेटे हैं।

एसएनडीपी का सामाजिक और राजनीतिक रुतबा है। खासकर दक्षिणी और मध्य केरल में। कई पार्टियों के नेता नतेशन के दरवाजे जाते रहे हैं। हाल ही में सबरीमाला मुद्दे को लेकर केरल के सीएम विजयन भी चर्चा करने पहुंचे थे। केरल की स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार नतेशन ने पिछले साल सबरीमाला कर्मा समिति की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि यह हिंदुओं के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। नतेशन का इशारा सबरीमाला मुद्दे पर ऊंची जातियों के प्रतिनिधियों की मीटिंग पर था। वह कई मौकों पर लेफ्ट और कांग्रेस, दोनों की आलोचना कर चुके हैं।

वायनाड लोकसभा सीट के तहत सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इस संसदीय क्षेत्र में मनंतावडी, तिरुवंबडी, वानदूर, सुल्तानबथेरी, एरनाड, कलपत्ता और निलंबूर विधानसभा सीटें आती हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को वायनाड लोकसभा सीट पर महज 20,870 वोटों के अंतर से जीत हासिल हुई थी।

कांग्रेस कैंडिडेट एमआई शानवास को एलडीएफ (सीपीएम) के सत्यन मोकेरी से कुल पड़े वोटों में से 1.81 प्रतिशत ज्यादा मत हासिल हुए थे। शानवास को 3,77,035 और मोकेरी को 3,56,165 वोट मिले थे। वहीं, बीजेपी के पीआर रस्मिलनाथ को 80,752 मत हासिल हुए थे। यूडीएफ यानी कांग्रेस को यहां 41.2 प्रतिशत और एलडीएफ को 39.39 प्रतिशत वोट मिले थे।

2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को वायनाड में बड़ी जीत हासिल हुई थी। यूडीएफ (कांग्रेस) के एमआई शानवास ने एलडीएफ (सीपीआई) के ऐडवोकेट एम रहमतुल्लाह को 1,53,439 के भारी मार्जिन से शिकस्त दी थी। शानवास को 4,10,703 और रहमतुल्लाह को 2,57,264 वोट हासिल हुए थे।